Rina Badiani Manek
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Rina Badiani Manek's blog post was featured

Don'T Go Far Off / Pablo Neruda

Don't go far off, not even for a day, because --because -- I don't know how to say it: a day is longand I will be waiting for you, as in an empty stationwhen the trains are parked off somewhere else, asleep.Don't leave me, even for an hour, becausethen the little drops of anguish will all run together,the smoke that roams looking for a home will driftinto me, choking my lost heart.Oh, may your silhouette never dissolve on the beach;may your eyelids never flutter into the empty distance.Don't…See More
Jul 29, 2015
Rina Badiani Manek's blog post was featured

दस्तक / रीना

हर दस्तक पेदिल धड़कने लगता हैकोई अनजान डर से....कुछ बढ़ ही जाती है तन्हाई......कभी महसूस होता हैजैसे कहींईंट पर ईंट चढ़ती जा रही हैन कोई दरवाज़ा ...न कोई दस्तक....और फिर भी एक इन्तज़ारकोई आए !!!!औरतोड़ दे यह पाँचवीं दीवार ..See More
Jul 5, 2015
Rina Badiani Manek's 2 blog posts were featured
Jul 4, 2015
Rina Badiani Manek posted a blog post

बनफ़्शे का फूल / परवीन शाकिर

वह पत्थर पे खिलते हुएख़ूबसूरत बनफ़्शे का इक फूल थीजिसकी सांसों में जंगल कीवहशी हवाएँ समायी हुई थीउसके बेसाख़्ता हुस्न को देखकरइक मुसाफ़िर बड़े प्यार से तोड़ करअपने घर ले गयाऔर फिरअपने दीवानख़ाने में रक्खे हुएकाँच के खूबसूरत से फूलदान मेंउसको ऐसे सजायाकि हर आनेवाले की पहली नज़रउस पे पड़ने लगीदाद-ओ-तहशी की बारिश मेंवह भीगता ही गयाकोई उससे कहेगोल्डन लीफ़ और यूडीकोलोन कीनर्म शहरी महक सेबनफ़्शे के नन्हें शगूफ़े का दम घुट रहा हैवह जंगल की ताज़ा हवा कोतरसने लगा हैSee More
Jul 3, 2015
Rina Badiani Manek posted a blog post

शाम एक वक़्फ़ा है ! / गुलज़ार

ये शाम एक वक़्फ़ा हैये एक ठंडी साँस हैये 'पेराग्राफ' हैतमाम रात-दिन यहीं पे रूकते हैंबदल के पहलू, फिर से बात तुम्हारी जारी रखते हैं !ये शाम एक वक़्फ़ा है !See More
Jun 30, 2015
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ख़ामोशी के कुएँ में / गुलज़ार

ख़ामोशी के कुएँ में उतरोरेत ही रेत पड़ी है ख़स्ता आवाज़ों कीमुर्दा लफ़्ज़ों के कंकर हैंकाई लगी है दीवारों पर !पानी......पानी कहीं नहीं है, ख़ामोशी का हलक़ भी सूख रहा है !!See More
Jun 30, 2015
Rina Badiani Manek commented on Nishit Joshi's blog post समंदर पे भी कभी किसीका पहरा होगा
"wahh"
Jun 30, 2015
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तख़लीक़ / मुहम्मद अलवी

एक ज़ंग आलूदातोप के दहाने मेंनन्ही मुन्नीचिड़िया नेघोंसला बनाया हैSee More
Jun 25, 2015
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तख़लीक़ / मुहम्मद अलवी

एक ज़ंग आलूदातोप के दहाने मेंनन्ही मुन्नीचिड़िया नेघोंसला बनाया हैSee More
Jun 25, 2015
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बारिश / गुलज़ार

कल सुबह जब बारिश ने आकर खिड़की पर दस्तक दी थीनींद में था मैं बाहर अभी अंधेरा थाये तो कोई वक़्त नहीं था, उठ कर उससे मिलने कामैंने परदा खींच दियागीला गीला एक हवा का झोंका उसनेफूंका मेरे मुंह पर लेकिनमेरी 'सैंस ऑफ़़ ह्युमर' भी कुछ नींद में थीमैंने उठ कर ज़ोर से खिड़की के पट उस पर भिड़ दिएऔर करवट लेकर, फिर बिस्तर में डूब गया ।शायद बुरा लगा था उसकोगुस्से में खिड़की के काँच पे हथड़ मार के लौट गई वोदोबारा फिर आई नहींखिड़की पर वो चटख़ा काँच अभी बाकी है !!See More
Jun 22, 2015
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बारिश / गुलज़ार

कल सुबह जब बारिश ने आकर खिड़की पर दस्तक दी थीनींद में था मैं बाहर अभी अंधेरा थाये तो कोई वक़्त नहीं था, उठ कर उससे मिलने कामैंने परदा खींच दियागीला गीला एक हवा का झोंका उसनेफूंका मेरे मुंह पर लेकिनमेरी 'सैंस ऑफ़़ ह्युमर' भी कुछ नींद में थीमैंने उठ कर ज़ोर से खिड़की के पट उस पर भिड़ दिएऔर करवट लेकर, फिर बिस्तर में डूब गया ।शायद बुरा लगा था उसकोगुस्से में खिड़की के काँच पे हथड़ मार के लौट गई वोदोबारा फिर आई नहींखिड़की पर वो चटख़ा काँच अभी बाकी है !!See More
Jun 22, 2015
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एक नया अनुभव / हरिवंशराय बच्चन

मैनें चिड़िया से कहा, मैं तुम पर एककविता लिखना चाहता हूँ।चिड़िया नें मुझ से पूछा, 'तुम्हारे शब्दों मेंमेरे परों की रंगीनी है?'मैंने कहा, 'नहीं'।'तुम्हारे शब्दों में मेरे कंठ का संगीत है?''नहीं।''तुम्हारे शब्दों में मेरे डैने की उड़ान है?''नहीं।''जान है?''नहीं।''तब तुम मुझ पर कविता क्या लिखोगे?'मैनें कहा, 'पर तुमसे मुझे प्यार है'चिड़िया बोली, 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'एक अनुभव हुआ नया।मैं मौन हो गया!See More
Jun 1, 2015
Rina Badiani Manek posted blog posts
May 31, 2015
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घुटन / गुलज़ार

जी में आता है कि इस कान में सुराख़ करूँखींचकर दूसरी जानिब से निकालूँ उसकोसारी की सारी निचोडूँ ये रगें साफ़ करूँभर दूँ रेशम की जलाई हुई भुक्की इसमेंकह्कहाती हुई भीड़ में शामिल होकरमैं भी एक बार हँसूँ, खूब हँसूँ, खूब हँसूSee More
May 29, 2015
Rina Badiani Manek posted a blog post

घुटन / गुलज़ार

जी में आता है कि इस कान में सुराख़ करूँखींचकर दूसरी जानिब से निकालूँ उसकोसारी की सारी निचोडूँ ये रगें साफ़ करूँभर दूँ रेशम की जलाई हुई भुक्की इसमेंकह्कहाती हुई भीड़ में शामिल होकरमैं भी एक बार हँसूँ, खूब हँसूँ, खूब हँसूSee More
May 29, 2015
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तूने ये हरसिंगार हिलाकर बुरा किया / दुष्यंत कुमार

तूने ये हरसिंगार हिलाकर बुरा कियापाँवों की सब ज़मीन को फूलों से ढँक दियाकिससे कहें कि छत की मुँडेरों से गिर पड़ेहमने ही ख़ुद पतंग उड़ाई थी शौक़ियाअब सब से पूछता हूँ बताओ तो कौन थावो बदनसीब शख़्स जो मेरी जगह जियामुँह को हथेलियों में छिपाने की बात हैहमने किसी अंगार को होंठों से छू लियाघर से चले तो राह में आकर ठिठक गयेपूरी हुई रदीफ़ अधूरा है काफ़ियामैं भी तो अपनी बात लिखूँ अपने हाथ सेमेरे सफ़े पे छोड़ दे थोड़ा सा हाशियाइस दिल की बात कर तो सभी दर्द मत उँडेलअब लोग टोकते हैं ग़ज़ल है कि मर्सियाSee More
May 19, 2015

Profile Information

First Language
Gujarati
Second Language
English
Interests
Poetry, reading, music

Rina Badiani Manek's Blog

Don'T Go Far Off / Pablo Neruda

Posted on July 29, 2015 at 1:06pm 0 Comments

Don't go far off, not even for a day, because --

because -- I don't know how to say it: a day is long

and I will be waiting for you, as in an empty station

when the trains are parked off somewhere else, asleep.



Don't leave me, even for an hour, because

then the little drops of anguish will all run together,

the smoke that roams looking for a home will drift

into me, choking my lost heart.



Oh, may your silhouette never dissolve on the… Continue

दस्तक / रीना

Posted on July 5, 2015 at 1:24pm 0 Comments

हर दस्तक पे
दिल धड़कने लगता है
कोई अनजान डर से....
कुछ बढ़ ही जाती है तन्हाई......

कभी महसूस होता है
जैसे कहीं
ईंट पर ईंट चढ़ती जा रही है
न कोई दरवाज़ा ...
न कोई दस्तक....
और फिर भी एक इन्तज़ार
कोई आए !!!!
और
तोड़ दे यह पाँचवीं दीवार ..

बनफ़्शे का फूल / परवीन शाकिर

Posted on July 3, 2015 at 1:27pm 0 Comments

वह पत्थर पे खिलते हुए

ख़ूबसूरत बनफ़्शे का इक फूल थी

जिसकी सांसों में जंगल की

वहशी हवाएँ समायी हुई थी

उसके बेसाख़्ता हुस्न को देखकर

इक मुसाफ़िर बड़े प्यार से तोड़ कर

अपने घर ले गया

और फिर

अपने दीवानख़ाने में रक्खे हुए

काँच के खूबसूरत से फूलदान में

उसको ऐसे सजाया

कि हर आनेवाले की पहली नज़र

उस पे पड़ने लगी

दाद-ओ-तहशी की बारिश में

वह भीगता ही गया



कोई उससे कहे

गोल्डन लीफ़ और यूडीकोलोन की

नर्म शहरी महक… Continue

बनफ़्शे का फूल / परवीन शाकिर

Posted on July 3, 2015 at 1:23pm 0 Comments

वह पत्थर पे खिलते हुए

ख़ूबसूरत बनफ़्शे का इक फूल थी

जिसकी सांसों में जंगल की

वहशी हवाएँ समायी हुई थी

उसके बेसाख़्ता हुस्न को देखकर

इक मुसाफ़िर बड़े प्यार से तोड़ कर

अपने घर ले गया

और फिर

अपने दीवानख़ाने में रक्खे हुए

काँच के खूबसूरत से फूलदान में

उसको ऐसे सजाया

कि हर आनेवाले की पहली नज़र

उस पे पड़ने लगी

दाद-ओ-तहशी की बारिश में

वह भीगता ही गया



कोई उससे कहे

गोल्डन लीफ़ और यूडीकोलोन की

नर्म शहरी महक… Continue

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At 8:44am on July 2, 2014, Jenny Osah said…

Hi dear how are you? my name is Jenny i will love to communicate with you

dear here is my mail id to know more about me

jennyosah@hotmail.com

thanks

Jenny.

 
 
 

Blog Posts

All these years

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 24, 2019 at 9:49am 0 Comments

All these errors

Friday,25th May 2019

 …

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I am nothing here

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 24, 2019 at 9:42am 0 Comments

I am nothing here

Friday,24th May 2019

 …

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Love is not

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 24, 2019 at 9:33am 0 Comments

Love is not

Friday,24th May 2019

 …

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Keep smiling

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 23, 2019 at 8:29am 0 Comments

Keep smiling

Thursday,23rd May 2019

 

Smile and happiness

always appear on the face

anyone can notice it

when coming in contact and greet

 

it emanates from within

and it is clearly seen

but if you frowning upon

the visible anger is also shown

 

the purity of a…

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Only preservation

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 23, 2019 at 8:23am 0 Comments

 

Only preservation

Thursday,23rd May 2019

 

I am not silent

or remain silent

but show through eyes

and honestly try

 

I have only one vision

with no confusion

and aim for consolidation

with the touch of human relation

 

I can respond to an honest…

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Next to God

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 23, 2019 at 8:18am 0 Comments

Next to God

Thursday,23rd May 2019

 

In this world

I have often told

there is no other

except for mother

 

I owe

and bow

my head in recognition

for her holy relation

 

she is my strength and

I can go to any length,

to explain her role

how…

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No parallel for freedom

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 22, 2019 at 3:04pm 0 Comments

No parallel for freedom

Wednesday,22nd May 2019

 …

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Light is within

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 22, 2019 at 3:01pm 0 Comments

Light is within

Wednesday,22nd May 2019

 …

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Their own contribution

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 22, 2019 at 2:56pm 0 Comments

Their contribution here

Monday,19th May 2019

 

You are a human being

but always try to bring

some kind of happiness

and wear a smile on the face

 

sometimes you are lucky

and remain blessed by an almighty

the person feels so much excited

and remains…

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Nothing concerns us

Posted by Hasmukh amathalal mehta on May 21, 2019 at 6:11am 0 Comments

Nothing concerns us 

​​​​​​​Monday,20th May 2019…

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